केंद्र सरकार देश में एनीमिया (खून की कमी) को तेजी से कम करने के लिए नई ऑपरेशनल गाइडलाइन जारी करेगी. इसके तहत अब तक लागू 6×6×6 रणनीति को बढ़ाकर 7×7×7 रणनीति बनाया गया है. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा सोमवार (29 जून) को 16वीं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद की बैठक में ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ (Anaemia Mukt Bharat Abhiyaan) की नई ऑपरेशनल गाइडलाइन जारी करेंगे.
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जांच से लेकर ट्रैकिंग बनेगा अभियान का हिस्सा
सरकार का कहना है कि कार्यक्रम को अधिक व्यापक, जन-केंद्रित और तकनीक आधारित अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा. इसके तहत अब केवल आयरन की गोलियां देने तक सीमित रहने के बजाय जांच, इलाज, सही खान-पान, डिजिटल ट्रैकिंग और जनभागीदारी को भी अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा. नई गाइडलाइन में पहली बार जन्म के समय कम वजन (Low Birth Weight) वाले 0 से 6 महीने तक के शिशुओं को सातवें लाभार्थी समूह के रूप में शामिल किया गया है. इसके अलावा ‘ईटिंग राइट’ (संतुलित और आयरन युक्त भोजन) को सातवें हस्तक्षेप के रूप में जोड़ा गया है, ताकि लोगों में रोजाना पोषणयुक्त भोजन की आदत विकसित हो सके.वहीं डिजिटल ट्रैकिंग के साथ मजबूत मॉनिटरिंग और मूल्यांकन प्रणाली को सातवें संस्थागत तंत्र के रूप में शामिल किया गया है.
T4 मॉडल लागू होगा
अभियान में टी3 (टेस्ट , ट्रीट , टॉक ) रणनीति की जगह अब टी4 (टेस्ट , ट्रीट , टॉक एंड ट्रैक ) मॉडल लागू किया जाएगा. इसके तहत लोगों की नियमित हीमोग्लोबिन जांच होगी, एनीमिया का राष्ट्रीय प्रोटोकॉल के अनुसार इलाज किया जाएगा, मरीजों की फॉलो-अप और रेफरल की डिजिटल ट्रैकिंग होगी तथा सही खान-पान के लिए परामर्श भी दिया जाएगा. सरकार का कहना है कि नई ऑपरेशनल गाइडलाइन से पोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को और मजबूती मिलेगी तथा देश को एनीमिया मुक्त भारत बनाने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से प्रगति होगी. नई गाइडलाइन में गंभीर एनीमिया से पीड़ित और इलाज का पर्याप्त असर न दिखाने वाली गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए इंट्रावेनस आयरन थेरेपी को भी शामिल किया गया है. इसके तहत फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (FCM) और आयरन सुक्रोज जैसी दवाओं का उपयोग किया जाएगा.
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डिजिटल होगा सभी रिकॉर्ड
नई व्यवस्था में एनीमिया से जुड़े सभी रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जाएगा. गर्भवती महिलाओं की जांच का रिकॉर्ड JANANI पोर्टल पर, जबकि बच्चों का रिकॉर्ड RBSK और U-WIN पोर्टल पर दर्ज होगा. इसमें बाद में इन सभी प्लेटफॉर्म को एकीकृत कर एनीमिया मुक्त भारत अभियान पोर्टल बनाया जाएगा, जिससे पूरे देश में एनीमिया सेवाओं की निगरानी, विश्लेषण और बेहतर योजना बनाना आसान होगा.