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संशोधन के अनुसार दुकानों और प्रतिष्ठानों का रिकॉर्ड श्रम विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर संधारित किया जाएगा। इससे कागजी कार्रवाई में कमी आएगी तथा विभागीय अभिलेखों का डिजिटलीकरण होगा। नए नियमों के तहत वेब पोर्टल के माध्यम से जारी श्रम पहचान संख्या प्रमाणपत्र अधिनियम एवं नियमों के अंतर्गत पूर्णतः वैध माना जाएगा। यदि आवेदन में दी गई जानकारी, तथ्य या दस्तावेज भ्रामक, त्रुटिपूर्ण अथवा असत्य पाए जाते हैं तो उसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी नियोक्ता की होगी। इससे स्व-घोषणा प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। अब प्रत्येक दुकान एवं स्थापना संचालक को प्रतिष्ठान के प्रमुख एवं स्पष्ट दिखाई देने वाले स्थान पर पंजीयन प्रमाणपत्र प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। यदि नियोक्ता या भागीदार का नाम, पता, कर्मचारियों की संख्या, प्रतिष्ठान का पता अथवा व्यवसाय की प्रकृति में परिवर्तन होता है, तो अब इसके लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। प्रमाणपत्र में किसी प्रकार के परिवर्तन या संशोधन के लिए 100 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसका भुगतान ई-चालान के माध्यम से करना होगा। संशोधन आवेदन प्राप्त होने के बाद नया या संशोधित पंजीयन प्रमाणपत्र भी 24 घंटे के भीतर ऑनलाइन जारी करने का प्रावधान किया गया है।
राज्य सरकार ने पुराने प्रपत्र-2 को पूरी तरह हटाकर नया प्रपत्र लागू किया है। इसमें पहले की तुलना में अधिक विस्तृत जानकारियां शामिल की गई हैं। नई जानकारी जो दर्ज करनी होगी, उसमें श्रम पहचान संख्या एवं दिनांक, प्रतिष्ठान का पूरा पता, ई-मेल एवं मोबाइल नंबर, व्यवसाय, व्यापार का स्वरूप, निजी अथवा सार्वजनिक स्थापना का विवरण, संगठन का प्रकार (प्रोपराइटर, पार्टनरशिप, एलएलपी, कंपनी, ट्रस्ट, सहकारी संस्था आदि), ईएसआई एवं ईपीएफ पंजीयन की जानकारी, नियोक्ता एवं प्रबंधक का विवरण, मुख्यालय की जानकारी, कर्मचारियों का वर्गवार विवरण, साप्ताहिक अवकाश का उल्लेख, कर्मचारियों का विस्तृत विवरण शामिल है।
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राजपत्र के अनुसार पुराने नियम 4, नियम 5 और प्रपत्र-2 को यथावत संशोधित नहीं किया गया, बल्कि उन्हें पूर्णतः प्रतिस्थापित कर दिया गया है। अर्थात पुराने प्रावधान अब प्रभावी नहीं रहेंगे और उनकी जगह नए नियम लागू होंगे। श्रमायुक्त हिम शिखर गुप्ता का कहना है कि यह संशोधन राज्य में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस‘ को बढ़ावा देगा। ऑनलाइन पंजीयन, 24 घंटे की समय-सीमा, स्व-घोषणा आधारित प्रमाणपत्र तथा संशोधन की डिजिटल व्यवस्था से छोटे दुकानदारों, व्यापारियों और सेवा प्रतिष्ठानों को बड़ी राहत मिलेगी। विभागीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। कुल मिलाकर, राज्य सरकार ने श्रम विभाग की सेवाओं को डिजिटल, समयबद्ध और स्व-प्रमाणन आधारित बनाकर व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक सरल और सुविधाजनक बना दिया है।