जानकारी के अनुसार, प्रार्थी अरुण कुमार भारद्वाज, निवासी ग्राम लिमतरा, जिला सक्ती ने एसीबी बिलासपुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि उनकी माता ग्राम पंचायत लिमतरा की सरपंच हैं। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत पंचायत में निर्मला घाट, नाली निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों के लिए 20 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे, जिनमें से 8 लाख रुपये का चेक पहले ही जारी किया जा चुका था।
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12 लाख रुपये का चेक जारी करने मांगी रिश्वत
शेष 12 लाख रुपये का चेक जारी कराने के लिए अरुण भारद्वाज को उनकी माता ने अधिकृत किया था। जब उन्होंने जनपद पंचायत सक्ती के सीईओ निखिल कश्यप और बाबू अविनाश ठाकुर से चेक जारी करने का अनुरोध किया, तो आरोपियों ने उससे 2 लाख रुपये कमीशन की मांग की। लेकिन प्रार्थी रिश्वत नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने इसकी शिकायत एसीबी से की।
शिकायत का ACB ने पहले सत्यापन कराया। जांच में पता चला कि आरोपियों द्वारा 2 लाख रुपये रिश्वत की मांग की गई थी, जिसमें से 1 लाख रुपये पहले ही कार्यालय के भृत्य लच्छन भानु के माध्यम से ले लिए गए थे। शेष 1 लाख रुपये लेने के लिए एसीबी ने योजना बनाकर प्रार्थी को जनपद पंचायत कार्यालय भेजा।
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ACB ने जाल बिछाकर रिश्वत लेते पकड़ा
एसीबी के अनुसार, सीईओ निखिल कश्यप ने रिश्वत की शेष राशि बाबू अविनाश ठाकुर को लेने के लिए कहा। वहीं अविनाश ठाकुर ने यह राशि कार्यालय के भृत्य लच्छन भानु को लेने के निर्देश दिए। जैसे ही प्रार्थी ने 1 लाख रुपये की रिश्वत राशि भृत्य लच्छन भानु को सौंपी, पहले से मौजूद एसीबी बिलासपुर की टीम ने कार्रवाई करते हुए सीईओ निखिल कश्यप, बाबू अविनाश ठाकुर और भृत्य लच्छन भानु को गिरफ्तार कर लिया। टीम ने मौके से 1 लाख रुपये की रिश्वत राशि भी बरामद कर ली। रिश्वत मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों के खिलाफ एसीबी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (PC Act) की धारा 7 और 12 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। एसीबी अधिकारियों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में एसीबी बिलासपुर इकाई की यह 51वीं सफल ट्रैप कार्रवाई है।