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Bypass Charging का क्या मतलब?
जैसा नाम से ही जाहिर है, इस चार्जिंग मेथड में बैटरी को बाइपास कर दिया जाता है. यानी पावर लेने के लिए फोन बैटरी को यूज नहीं करता है. यह सीधा चार्जिंग एडेप्टर से ही पावर लेकर फोन को ऑपरेट करता है. इसमें फोन उतनी ही पावर ड्रॉ करता है, जितनी प्रोसेसर, डिस्प्ले और अन्य कंपोनेंट्स के लिए जरूरी है. अगर फोन चार्जिंग पर लगा है तो इसके कंपोनेंट्स बैटरी को छोड़कर सीधे एडेप्टर से पावर ले लेंगे. जैसे ही एडेप्टर बंद हो जाएगा, बैटरी अपना काम करना शुरू कर देगी.
इन बातों का रखना होगा ध्यान
गेमिंग और स्ट्रीमिंग के अलावा दूसरी ऐप्स के लिए भी बाइपास चार्जिंग को यूज किया जा सकता है. हालांकि, आमतौर पर लोग उन कामों के लिए इस तरीके को ज्यादा यूज करते हैं, जिनमें बैटरी की खपत ज्यादा होती है. बाइपास चार्जिंग के लिए चार्जर कंपैटिबल होना बहुत जरूरी है और बैटरी के कम से कम 20 प्रतिशत चार्ज होने के बाद ही इस मोड को ऑन करना चाहिए. फोन की चार्जिंग सेटिंग में जाकर इस फीचर को ऑन किया जा सकता है. बता दें कि अभी यह फीचर सेलेक्टेड फोन में ही मौजूद है और इस पर कई लिमिटेशन भी है.
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क्या इससे फोन ओवरहीट नहीं होता?
बाइपास चार्जिंग को लेकर एक डर ओवरहीटिंग का बना रहता है. अगर आपको भी यह चिंता है तो बता दें कि बाइपास चार्जिंग से फोन हीट नहीं होता. इसमें बैटरी की भूमिका लगभग खत्म हो जाती है. इसलिए इसमें हीट जनरेट नहीं होती और घंटों तक फोन यूज किया जा सकता है. इस प्रोसेस से बैटरी पर लोड कम हो जाता है, जो बैटरी लाइफ को बढ़ाने में मदद करता है.