सबसे बड़ी चिंता आवाज की तीव्रता और इस्तेमाल की अवधि को लेकर है. ईयरफोन बहुत कम दूरी से तेज आवाज सीधे कानों तक पहुंचाते हैं. लगातार ऊंची आवाज़ में संगीत सुनना या लंबे समय तक ईयरफोन लगाए रखना, दोनों ही खतरनाक हैं. इसके अलावा, ईयरफोन अलग-अलग जगहों पर रखे जाते हैं, जिससे उन पर बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं. इन्हें शेयर करने से इंफेक्शन का खतरा और बढ़ जाता है.
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क्या होती है दिक्कत?
एक रिपोर्ट के अनुसार, जब हम तेज़ आवाज में कुछ सुनते हैं तो ध्वनि तरंगें कान के पर्दे को कंपन करती हैं. यह कंपन अंदरूनी कान के कोक्लिया तक पहुंचता है, जहां हजारों सूक्ष्म हेयर सेल्स होती हैं. तेज आवाज इन कोशिकाओं पर ज्यादा दबाव डालती है. लगातार ऐसा होने पर ये सेल्स अपनी संवेदनशीलता खो सकती हैं या स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं. यही स्थिति शोर से होने वाली सुनने की कमी का कारण बनती है.
कई लोगों को कानों में घंटी बजने जैसी आवाज़ सुनाई देने लगती है, जिसे टिनिटस कहा जाता है. कुछ मामलों में सामान्य आवाजें भी असहनीय लगने लगती हैं, जिसे हाइपरएक्यूसिस कहते हैं. लंबे समय तक तेज शोर के संपर्क में रहने से चक्कर आना, कान दर्द, अत्यधिक ईयरवैक्स जमा होना और बार-बार इंफेक्शन की समस्या भी हो सकती है.
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इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए?
हेल्थ एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि आवाज़ हमेशा मध्यम रखें और लगातार लंबे समय तक न सुनें. नॉइज-कैंसिलिंग या ओवर-द-ईयर हेडफोन बेहतर विकल्प हो सकते हैं क्योंकि ये बाहरी शोर कम कर देते हैं, जिससे वॉल्यूम बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती. ईयरफोन को रेगुलर रूप से साफ करना भी जरूरी है. सफर के दौरान पहले से शोर भरे माहौल में ईयरफोन लगाने से बचें, क्योंकि इससे कुल डेसिबल स्तर और बढ़ जाता है. छोटी-सी सावधानी आपके कानों को स्थायी नुकसान से बचा सकती है.