रेगिस्तानी पश्चिमी राजस्थान में खजूर के पेड़ बहुतायत में पाए जाते हैं. ये अब सूखे इलाकों के लिए उम्मीद जगाने वाली फसल के तौर पर उभर रहे हैं. राज्य में पहली बार, बीकानेर के स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय ने बांग्लादेश को 11 टन से ज्यादा ताजे खजूर निर्यात किए हैं. आईसीएआर के ‘सूखे इलाकों के फलों पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना’ के तहत विश्वविद्यालय में खजूर की 54 से ज्यादा किस्मों का संग्रह है. निर्यात किए गए खेप में मुख्य रूप से प्रीमियम ‘हलावी’ किस्म शामिल थी.
खजूर अनुसंधान केंद्र के डॉ. राजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा,”खजूर अनुसंधान केंद्र से इस बार यहां से करीब 11 टन माल बांग्लादेश को गया है. उसका कारण है कि जो यहां बीकानेर क्षेत्र के अंदर खजूर हो रहा है, उसकी क्वालिटी अच्छी है. खजूर का एक मार्केट धीरे-धीरे देश ही नहीं, देश के बाहर भी बन रहा है. अभी जो बांग्लादेश माल गया है उसमें हलावी किस्म के खजूर की मात्रा ज्यादा है.” उन्होंने बताया कि बांग्लादेश को खजूर के निर्यात से विश्वविद्यालय को लगभग 10 लाख रुपये की आमदनी हुई. उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे पूरे इलाके में खजूर उगाने वालों के लिए आय बढ़ाने के नए मौके पैदा होंगे.
स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेंद्र बाबू ने कहा, “पहली बार राजस्थान के इतिहास में हुआ है कि बीकानेर से इतनी मात्रा में खजूर बाहर निर्यात किया गया है. इससे विश्वविद्यालय को करीब 10 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ है. निश्चित रूप में मैं कह सकता हूं कि खजूर राजस्थान के लिए वरदान साबित हो सकता है. किसान उगा भी रहे हैं. अभी बीकानेर जिले में लगभग 350 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खजूर की खेती हो रही है.” कृषि वैज्ञानिकों के प्रयास और सरकारी प्रोत्साहन की बदौलत बीकानेर में खजूर की खेती तेजी से बढ़ रही है. माना जा रहा है कि इससे किसानों की आमदनी बेहतर होगी और राजस्थान की निर्यात क्षमता भी बढ़ेगी.
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