JDA के मुताबिक, 18 सितंबर को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के साथ हुई बैठक में संगठन ने अपनी प्रमुख मांगें रखी थीं। चर्चा के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने मांगों के समाधान के लिए 7 दिनों का समय मांगा था। इसके बाद JDA ने प्रस्तावित आंदोलन को स्थगित करते हुए इस अवधि में नियमित चिकित्सा सेवाएं जारी रखीं।
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सात दिन बाद भी नहीं हुआ ठोस निर्णय
JDA का कहना है कि सात दिनों की निर्धारित अवधि पूरी होने के बावजूद संगठन की तीन प्रमुख मांगों को लेकर अब तक अपेक्षित ठोस निर्णय या आदेश जारी नहीं हुआ है। इसी के चलते संगठन ने प्रदेशभर में OPD सेवाओं के बहिष्कार का फैसला लिया है।
JDA ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन के दौरान मरीजों को चिकित्सकीय सलाह मिलती रहे, इसके लिए अस्पतालों के बाहर समानांतर OPD संचालित की जाएगी।
28 सितंबर से Emergency सेवाओं पर भी असर की तैयारी
संगठन के अनुसार, यदि मांगों के समाधान की दिशा में निर्धारित समय में ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो 28 सितंबर से आंदोलन का अगला चरण शुरू किया जा सकता है। इस चरण में PG Residents, MBBS Interns, Bonded Medical Officers और Senior Residents द्वारा प्रदेशभर में Emergency सेवाओं से भी हटने का प्रस्ताव है।
JDA छत्तीसगढ़ ने कहा कि संगठन का उद्देश्य मरीजों को परेशान करना नहीं है। संगठन लंबे समय से लंबित चिकित्सकों और मेडिकल छात्रों की मांगों के समयबद्ध और नीतिगत समाधान की मांग कर रहा है।
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JDA के अनुसार, अब तक बातचीत और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक माध्यमों को प्राथमिकता दी गई है। संगठन ने सरकार से मरीजों और चिकित्सकों दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द ठोस निर्णय लेने की अपील की है।