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क्या होते हैं इसके लक्षण?
रिपोर्ट के अनुसार, किडनी से जुड़ी समस्या में अक्सर कमर के निचले हिस्से या पसलियों के नीचे दर्द महसूस होता है. यह दर्द कभी-कभी पेट के किनारों या कमर के आसपास तक फैल सकता है. शुरुआत में हल्का दर्द होता है, लेकिन धीरे-धीरे यह रीढ़, जांघों और पेट तक भी पहुंच सकता है. अगर लगातार कमर दर्द के साथ अन्य लक्षण भी दिखें, तो इसे हल्के में न लें.
किडनी खराब होने के शुरुआती संकेतों में बार-बार यूरिन आना शामिल है. यह सिर्फ ज्यादा पानी पीने की वजह से नहीं होता, बल्कि किडनी की कार्यक्षमता में गड़बड़ी के कारण भी हो सकता है. पेशाब करते समय जलन या दर्द महसूस होना भी गंभीर संकेत है, जो किडनी या यूरिनरी ट्रैक्ट में समस्या की ओर इशारा करता है. सामान्य तौर पर पेशाब का रंग हल्का पीला होता है, लेकिन अगर पर्याप्त पानी पीने के बावजूद रंग गहरा या धुंधला बना रहे, तो जांच करानी चाहिए. यूरिन में खून दिखना तो बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
चेहरे या आंखों से भी नजर आते हैं लक्षण?
सुबह उठते समय चेहरे या आंखों के नीचे सू जन दिखना भी किडनी की गड़बड़ी का संकेत हो सकता है. यह शरीर में पानी जमा होने की वजह से होता है. बिना ज्यादा मेहनत के लगातार थकान महसूस होना, भूख कम लगना, बार-बार उल्टी या मतली आना भी किडनी फेलियर के लक्षण हो सकते हैं. शरीर में विषैले तत्व जमा होने से एनर्जी की कमी और कमजोरी महसूस होती है. त्वचा में लगातार खुजली होना या सांस लेने में दिक्कत आना भी गंभीर संकेत हैं. शरीर में तरल पदार्थ जमा होने से सांस फूल सकती है, यहां तक कि सामान्य बातचीत या थोड़ी-सी चाल में भी.
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कब मिलना चाहिए डॉक्टर से?
अगर इनमें से पांच या उससे अधिक लक्षण नजर आएं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. शुरुआती चरण में पहचान और इलाज से किडनी को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है. पर्याप्त पानी पिएं, लेकिन सोने से ठीक पहले ज्यादा तरल पदार्थ लेने से बचें. नमक का सेवन नियंत्रित रखें, नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं और ब्लड प्रेशर व वजन पर नजर रखें. समय पर सतर्कता ही किडनी की सुरक्षा की सबसे बड़ी कुंजी है.