Major Abhilasha Barak: भारत के लिए खुशी का मौका है. भारत की बेटी मेजर अभिलाषा बराक को UN का प्रतिष्ठित ‘यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड’ मिलने जा रहा है. बराक भारत की तीसरी महिला हैं, जिन्हें लैंगिक समानता के क्षेत्र में उनके कामों रे लिए यह अवॉर्ड दिया जा रहा है. बराक से पहले मेजर सुमन गवानी और मेजर राधिका सेन को संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में उनके सराहनीय काम के लिए ये सम्मानित मिला था. अभिलाषा के साथ ही दो अन्य भारतीय शांति सैनिकों को भी ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने के लिए मरणोपरांत सम्मानित किया जाएगा. मेजर अभिलाषा को दिया जा रहा ये सम्मान वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और हमारे सैनिकों की बहादुरी का प्रतीक है. मेजर अभिलाषा बराक के बारे में जानें.
मेजर अभिलाषा बराक भारतीय सेना की पहली महिला लड़ाकू हेलीकॉप्टर पायलट भी हैं. वह संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल लेबनान (यूएनआईएफआईएल) में महिला सहभागिता दल (एफईटी) की कमांडर के रूप में भारतीय बटालियन में सेवाएं दे रही हैं. उनको यह सम्मान संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 29 मई को दिया जाएगा. बता दें कि विश्व संस्था 29 मई को हर साल संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाती है.
मेजर अभिलाषा बराक यह खास सम्मान पाने वाली तीसरी भारतीय महिला सैन्य अधिकारी हैं. उनको पश्चिम एशियाई देश में तैनाती के दौरान महिलाओं और लड़कियों के साथ किए गए संपर्क की कोशिशों के लिए 2025 का ‘यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड’ दिया जा रहा है. उनसे पहले मेजर सुमन गवानी और मेजर राधिका सेन ये सम्मान पा चुकी हैं.
शांति अभियान विभाग (डीपीओ) के तहत सैन्य मामलों के कार्यालय ने इस अवॉर्ड को 2016 में शुरू किया था. यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रतिष्ठित अवॉर्ड है. यह अवॉर्ड सैन्य शांतिरक्षकों के योगदान को सराहने के लिए दिया जाता है.
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