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एक्सपर्ट्स के अनुसार जब पेट में बनने वाला हाइड्रोक्लोरिक एसिड जरूरत से ज्यादा बनने लगता है या खाना ठीक से नहीं पच पाता तो एसिड ऊपर भोजन नली तक पहुंच जाता है. इसी वजह से खट्टी डकार, सीने में जलन, मुंह में कड़वाहट और गैस जैसी समस्याएं होने लगती है. वहीं आधुनिक चिकित्सा इसे एसिड रिफ्लक्स या ग्रेड से जोड़ती है, जबकि आयुर्वेद में इसे बढ़े हुए पित्त दोष का असर माना जाता है.
लाइफस्टाइल भी इसकी बड़ी वजह माने जा रही है. देर रात तक तला-भूना और ज्यादा मसालेदार भोजन कार्बोनेटेड ड्रिंक, शराब, धूम्रपान, जल्दी-जल्दी खाना और भोजन के तुरंत बाद लेट जाना पेट का पीएच लेवल बिगाड़ देता है. इसके कारण गैस बनने लगती है और खट्टी डकार की परेशानी बढ़ जाती है. तनाव और खराब नींद भी समस्या को गंभीर बना सकती है.
कुछ मामलों में खट्टी डकार सिर्फ एसिडिटी नहीं, बल्कि पेट में बैक्टीरियल इन्फेक्शन का संकेत भी हो सकती है. हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार एच. पाइलोरी बैक्टीरिया या पाचन तंत्र में गड़बड़ी के कारण बदबूदार डकार, पेट फूलना और एसिड रिफ्लक्स की शिकायत हो सकती है. इसके अलावा आईबीएस, लेक्टोज इनटोलरेंस और पाचन संबंधी दूसरी समस्या भी बार-बार डकार आने की वजह बनती है.
डॉक्टरों का कहना है कि अगर सप्ताह में कई बार लगातार खट्टी डकार आ रही है और इसके साथ पेट दर्द, उल्टी, दस्त, वजन कम होना या खाना निकालने में दिक्कत जैसे समस्याएं भी हो रही है तो तुरंत जांच करवानी चाहिए. लंबे समय तक एसिडिटी बने रहने पर भोजन नली से जुड़ी गंभीर बीमारी का खतरा भी बढ़ सकता है.
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आयुर्वेद में इस समस्या से राहत पाने के लिए कई आसान घरेलू उपाय बताए गए है. जैसे भोजन के बाद सौंफ और मिश्री खान पाचन को बेहतर बनाता है और गैस कम करने में मदद करता है. गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पीना भी फायदेमंद माना गया है. खाली पेट नारियल पानी पीने से पेट का एसिड नियंत्रित रहता है और हाइड्रेट भी रहता है.
एक्सपर्ट्स खाने के तुरंत बाद लेटने से बचने की सलाह देते हैं. खाने के बाद भी कुछ देर टहलने और रात में बाईं करवट सोना एसिड रिफ्लक्स को कम कर सकता है. पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, कार्बोनेटेड ड्रिंक से दूरी बनाए रखना और छोटे-छोटे हिस्सों में भोजन करना भी पाचन को बेहतर बनाए रखने में मददगार साबित होता है.