मध्य प्रदेश: राज्य सेवा की अधिकारी और सिंगरौली नगर निगम की आयुक्त सविता प्रधान की एक नई इंस्टाग्राम पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा में है। उन्होंने कविता के जरिए राधा, रुक्मिणी, सीता, उर्मिला, द्रौपदी, अहिल्या और यशोधरा जैसी पौराणिक स्त्रियों का उदाहरण देते हुए रिश्तों में सम्मान और समानता की बात कही है। उनकी पोस्ट में त्याग, प्रतीक्षा, अपमान और समझौते वाले संबंधों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
सविता प्रधान ने पोस्ट में लिखा, “मैं नहीं हूं राधा जैसी, जो बिन सम्मान प्रेमिका बस बन जाऊंगी।” इसी तरह उन्होंने रुक्मिणी, सीता और अन्य पौराणिक पात्रों का जिक्र करते हुए कहा कि वह ऐसा रिश्ता स्वीकार नहीं करेंगी, जिसमें महिला को सिर्फ त्याग या परीक्षा से गुजरना पड़े।
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सविता प्रधान की पोस्ट पर हो रही चर्चा
सविता प्रधान ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में दो तस्वीरें भी साझा की हैं, जिनमें वह भक्ति भाव में नजर आ रही हैं। पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स इस पर लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोग उनकी कविता को उनके निजी जीवन के संघर्षों से जोड़कर भी देख रहे हैं।
अपनी कविता के अंत में सविता प्रधान ने लिखा, “मैं सती जैसी हूं प्रिय! मुझे पाने तुमने तांडव किया! तब ही ‘शिव’ की ‘शक्ति’ कहलाऊंगी।”
कैंसर पीड़ित बच्ची के लिए मुंडवाए थे बाल
सविता प्रधान इससे पहले एक कैंसर पीड़ित बच्ची की मदद के लिए अपने बाल मुंडवाने को लेकर भी चर्चा में रही थीं। उन्होंने बच्ची के लिए विग बनवाने के उद्देश्य से अपने बाल दान किए थे। उनके इस कदम की सोशल मीडिया पर काफी सराहना हुई थी।
संघर्षों के बीच हासिल की MPPSC में सफलता
सविता प्रधान का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। वह मूल रूप से मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के मड़ई गांव की रहने वाली हैं और आदिवासी परिवार से आती हैं। उनके पिता बीड़ी पत्ते तोड़ने, महुआ बीनने और मजदूरी जैसे काम करके परिवार का पालन-पोषण करते थे। सविता अपने गांव से 10वीं कक्षा पास करने वाली पहली महिला बनीं।
महज 16 वर्ष की उम्र में उनकी शादी उनसे 11 साल बड़े युवक से कर दी गई थी। शादी के बाद उन्हें घरेलू हिंसा और ससुराल में प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने दोनों बेटों अर्थव और युजस की जिम्मेदारी संभालते हुए पढ़ाई जारी रखी।
परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने ब्यूटी पार्लर में काम किया और इसी दौरान MPPSC परीक्षा की तैयारी भी करती रहीं।
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पहले प्रयास में बनीं DSP
सविता प्रधान ने वर्ष 2005 में MPPSC परीक्षा के अपने पहले प्रयास में मध्य प्रदेश पुलिस सेवा में DSP पद हासिल किया। इसके बाद वर्ष 2006 में दूसरे प्रयास में उन्होंने राज्य प्रशासनिक सेवा में सफलता प्राप्त की और प्रदेश में 83वीं रैंक हासिल की।
वर्तमान में सविता प्रधान मध्य प्रदेश के सिंगरौली नगर निगम में आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं। उनके संघर्ष और प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने की कहानी लंबे समय से लोगों के बीच प्रेरणा का विषय रही है।



