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UCC Bill में लिव-इन रिलेशनशिप पर खास प्रावधान
विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधानों के लिए धारा 384 से 401 तक कुल 18 धाराएं रखी गई हैं। इनमें लिव-इन रिलेशनशिप की परिभाषा, रजिस्ट्रेशन, उससे होने वाली संतान, रजिस्ट्रेशन नहीं कराने की स्थिति, उसके प्रभाव और सजा से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
सरकार ने लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी दायरे में लाने के लिए रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था प्रस्तावित की है। इसका मतलब है कि पात्रता पूरी करने वाले जोड़ों को अपने रिश्ते का पंजीकरण कराना होगा।
राजस्थान से बाहर रहने वाले नागरिकों पर भी लागू होगा नियम
प्रस्तावित कानून में केवल राजस्थान में रहने वाले लोगों को ही शामिल नहीं किया गया है। अगर राजस्थान का कोई नागरिक किसी दूसरे राज्य में रहता है और लिव-इन रिलेशनशिप में है, तो उसके लिए भी रजिस्ट्रेशन का प्रावधान लागू होगा।
इसी तरह, किसी दूसरे राज्य का व्यक्ति राजस्थान में रह रहा है और लिव-इन रिलेशनशिप में है, तो राजस्थान के रिकॉर्ड में उसका निवासी होना जरूरी नहीं होगा। राजस्थान में रहना और प्रस्तावित कानून के दायरे में आना उसके लिए रजिस्ट्रेशन की जरूरत पैदा करेगा। हालांकि, सरकार ने विदेशी नागरिकों को इस प्रावधान से बाहर रखा है।
शादीशुदा व्यक्ति लिव-इन का रजिस्ट्रेशन नहीं करा सकेगा
विधेयक के प्रस्तावित प्रावधानों में लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन के लिए कुछ शर्तें भी तय की गई हैं। अगर दोनों में से कोई एक व्यक्ति पहले से शादीशुदा है, तो ऐसे लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा। इसी तरह, अगर दोनों व्यक्ति कानून में परिभाषित प्रतिबंधित नातेदारी की डिग्री के भीतर आते हैं, तो भी उनके लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा।
जबरदस्ती या दबाव में बने रिश्ते को नहीं मिलेगी मंजूरी
प्रस्तावित UCC Bill में सहमति को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। अगर कोई व्यक्ति अपने पार्टनर की सहमति के बिना जबरन, बलपूर्वक, गलत प्रभाव या दबाव के जरिए लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का दावा करता है, तो ऐसे रिश्ते का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। इस तरह कानून के प्रस्तावित प्रावधान में लिव-इन रिलेशनशिप के साथ दोनों पक्षों की सहमति और निर्धारित पात्रता को जरूरी माना गया है।
लिव-इन से होने वाली संतान को वैध माना जाएगा
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि रजिस्टर्ड लिव-इन रिलेशनशिप से होने वाली संतान को वैध माना जाएगा। यानी विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों की कानूनी स्थिति को भी स्पष्ट करने का प्रावधान रखा गया है। यह प्रावधान लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़ी संतान के अधिकारों और कानूनी स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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UCC Bill में शादी, तलाक और उत्तराधिकार के भी नियम
राजस्थान सरकार की ओर से पेश किया गया UCC Bill करीब 400 पन्नों का है। विधेयक के उद्देश्यों में सभी नागरिकों के लिए पर्सनल लॉ में समानता, न्याय और एकरूपता सुनिश्चित करने की बात कही गई है। सरकार के अनुसार, विधेयक के जरिए प्रदेश में एकीकृत कानूनी ढांचा तैयार करने का प्रयास किया गया है। इसमें शादी, तलाक और उत्तराधिकार के लिए समान नियम लागू करने का प्रस्ताव है।