School Summer Vacations: आमतौर पर स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां करीब 45 दिनों की हुआ करती थीं, जिससे बच्चों को नानी के घर जाने और घूमने-फिरने का लंबा वक्त मिल जाता था। लेकिन इस बार शिक्षा विभाग ने नया फैसला लिया है। नए शैक्षणिक सत्र (Academic Session) को पूरी तरह व्यवस्थित करने और पढ़ाई को समय पर पूरा कराने के उद्देश्य से इस बार छुट्टियों के दिनों में कटौती की गई है। पहले के नियमों के मुताबिक, 21 जून को सिर्फ ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ मनाने के लिए स्कूल खुलते थे और फिर उसके बाद सीधे 1 जुलाई से परमानेंट पढ़ाई शुरू होती थी। लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। चूंकि नया सेशन 1 अप्रैल से ही शुरू हो चुका है, इसलिए सरकार ने फैसला लिया है कि 21 जून से ही स्कूलों में बच्चों की रेगुलर पढ़ाई शुरू करवा दी जाएगी।
छुट्टियों में भी ऑनलाइन रहेगा पढ़ाई से जुड़ाव
भले ही स्कूल फिजिकली बंद हो गए हैं, लेकिन बच्चों का पढ़ाई से नाता पूरी तरह नहीं टूटेगा। स्कूलों ने बच्चों को गर्मियों का अच्छा-खासा होमवर्क दिया है। इसके अलावा, स्कूलों ने अभिभावकों के व्हाट्सएप ग्रुप बनाए हैं, जिन पर समय-समय पर पढ़ाई और एक्टिविटीज से जुड़ी जरूरी जानकारियां भेजी जाती रहेंगी। कई स्कूल तो ऑनलाइन क्लास और डिजिटल एक्टिविटीज के जरिए भी बच्चों को व्यस्त रखेंगे। खासकर जो छात्र इस बार बोर्ड की कक्षाओं यानी 10वीं और 12वीं में आए हैं, उन पर स्कूलों का सबसे ज्यादा फोकस रहेगा ताकि वे छुट्टियों में भी बोर्ड परीक्षा की तैयारी करते रहें।
कुछ निजी स्कूल 25 मई से करेंगे छुट्टी
जहां सरकारी और ज्यादातर प्राइवेट स्कूल आज से बंद हो गए हैं, वहीं अलवर जिले के कई बड़े प्राइवेट स्कूलों ने अपनी छुट्टियों का शेड्यूल थोड़ा अलग रखा है। इन स्कूलों में 25 मई से ग्रीष्मावकाश घोषित किया जाएगा, यानी ये स्कूल अभी एक हफ्ता और चलेंगे। हालांकि, बच्चों को गर्मी से राहत देने के लिए इन स्कूलों ने ड्रेस कोड में ढील दी है और छात्र बिना स्कूल यूनिफॉर्म के ही आ रहे हैं।
गर्मी में पक्षियों के लिए परिंडे बांधने की अपील
छुट्टियों की घोषणा के साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बच्चों से एक खास और नेक अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि इस कड़कड़ाती गर्मी में बच्चे अपने घरों की छतों और आसपास पशु-पक्षियों के लिए पानी के परिंडे (मिट्टी के बर्तन) जरूर लगाएं। इसके साथ ही, गांवों में चल रहे जनगणना के काम में जुटे शिक्षकों का सहयोग करने के लिए भी स्थानीय लोगों को प्रेरित किया गया है।


