अभ्यास शुरू होने से एक दिन पहले शुक्रवार को ही कई मित्र देशों के बड़े ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट जोधपुर एयरबेस पहुंचने लगे। इनमें रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयरफोर्स का C-130J सुपर हरक्यूलिस, अमेरिकी वायुसेना का C-17 ग्लोबमास्टर, बांग्लादेश का C-130J और फ्रांस की वायुसेना का A330 MRTT शामिल है। इन विमानों के जरिए विदेशी सैन्य दल, तकनीकी स्टाफ और आवश्यक उपकरण जोधपुर पहुंच चुके हैं।
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अब शनिवार से विभिन्न देशों के लड़ाकू विमानों के पहुंचने का सिलसिला शुरू होगा। अभ्यास के जरिए भारतीय वायुसेना मित्र देशों के साथ संयुक्त अभियानों, लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशनल क्षमताओं के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करेगी।
100 से ज्यादा लड़ाकू विमान होंगे शामिल
‘तरंग शक्ति’ का यह दूसरा संस्करण है। इसका पहला संस्करण वर्ष 2024 में तमिलनाडु के सुलूर और जोधपुर में आयोजित किया गया था। इस बार अभ्यास का दायरा पहले की तुलना में काफी बड़ा रखा गया है।
इस युद्धाभ्यास में भारत के अलावा अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, यूएई, श्रीलंका, बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया की वायुसेनाएं अपने लड़ाकू विमानों के साथ हिस्सा लेंगी।
अभ्यास में 100 से अधिक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान शामिल होंगे और करीब 3,000 सैन्यकर्मी व पायलट इसका हिस्सा बनेंगे। इसके अलावा 32 अन्य देश ऑब्जर्वर के तौर पर अभ्यास की गतिविधियों को देखेंगे।
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कई एयरबेस से संचालित होगा अभ्यास
अभ्यास के व्यापक स्वरूप को देखते हुए इसके संचालन के लिए 4 से 5 प्रमुख एयरबेस का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें जोधपुर एयरबेस की अहम भूमिका रहेगी।
‘तरंग शक्ति-2026’ के जरिए भारतीय वायुसेना विभिन्न देशों के साथ संयुक्त हवाई अभियानों और सामरिक सहयोग का अभ्यास करेगी। जोधपुर में विदेशी सैन्य दलों और विमानों की मौजूदगी से पश्चिमी राजस्थान में सैन्य गतिविधियां भी बढ़ गई हैं।