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योग दादी का शुरुआती जीवन और योग से जुड़ाव
योग दादी के नाम से मशहूर वी नानम्मल का जन्म 1920 में तमिलनाडु के एक किसान परिवार में हुआ था। उन्हें बचपन में अपने दादाजी को योग करते देखकर प्रेरणा मिली। नियमित अभ्यास और सादगीपूर्ण जीवनशैली ने योग को उनका जीवनधर्म बना दिया। नानम्मल ने कम उम्र में ही योग के प्रति समर्पण दिखाया। उन्होंने पारंपरिक आसनों का अभ्यास किया और समय के साथ 50 से अधिक आसनों में दक्षता हासिल की।
45 वर्षों की साधना, लाखों शिष्यों की प्रेरणा
नानम्मल ने करीब 45 वर्षों तक निरंतर योग प्रशिक्षण किया। लगभग 10 लाख से अधिक लोगों को योग सिखाया। वह रोज़ाना लगभग 100 लोगों को प्रशिक्षण देती थीं, वह भी 99 वर्ष की आयु में। उनके कई शिष्य आज देश-विदेश में योग शिक्षक हैं। उनके परिवार में छह बच्चे, 12 पोते-पोतियां और 11 परपोते-परपोतियां हैं जो कोयंबटूर में उनकी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
सम्मान और उपलब्धियां
- वी नानम्मल को नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
- वह पद्म श्री से अलंकृत भी हैं।
इन सम्मानों ने उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी।
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योगा पाटी की खास पहचान
- 90 पार की उम्र में भी शीर्षासन और कठिन आसनों में दक्ष हैं।
- साधारण जीवन, शुद्ध भोजन और नियमित दिनचर्या
- गुलाबी साड़ी में योग करते उनके वीडियो सोशल मीडिया पर प्रेरणा बने
वी नानम्मल की विरासत
वी. नानम्मल का निधन 2019 में हुआ, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। उन्होंने यह दिखाया कि नियमित अभ्यास से शरीर और मन दोनों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है