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बेनो जेफिन का जीवन और शिक्षा
बेनो जेफिन का जन्म केरल में हुआ। बचपन से ही उन्हें दृष्टि संबंधी समस्या थी और धीरे-धीरे उनकी आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई। लेकिन उन्होंने कभी अपनी कमजोरी को अपनी पहचान नहीं बनने दिया। बचपन से ही उन्होंने ठान लिया था कि वे सिविल सेवा में जाएंगी और देश की सेवा करेंगी। उन्होंने अपनी पढ़ाई ब्रेल लिपि के माध्यम से पूरी की। हर दिन नई चुनौतियां सामने आती थीं, लेकिन उनका आत्मविश्वास और मेहनत उन्हें आगे बढ़ाते रहे।
माता-पिता का सहयोग
बेनो जेफिन की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का अतुलनीय योगदान रहा।
- उनकी मां रोज अखबार पढ़कर सुनाती थीं, ताकि उन्हें देश-दुनिया की खबरें मिलती रहें।
- उनके पिता ब्रेल में अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराते थे, जिससे उनकी तैयारी मजबूत होती गई।
यही समर्पण और मार्गदर्शन उन्हें यूपीएससी की तैयारी में लगातार प्रेरित करता रहा।
UPSC में सफलता और IFS में चयन
कड़ी मेहनत और अटूट विश्वास के बल पर उन्होंने 2014 में यूपीएससी परीक्षा पास की और इतिहास रच दिया। इसके बाद 2015 में आईएफएस में शामिल हुईं और भारत की पहली नेत्रहीन IFS अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं थी, बल्कि यह पूरे देश के लिए प्रेरणा का क्षण था।
वर्तमान पद और योगदान
आज बेनो जेफिन अजगिरी जकार्ता में भारतीय दूतावास में फर्स्ट सेक्रेटरी के रूप में देश की सेवा कर रही हैं। उनकी कार्यशैली, प्रतिबद्धता और आत्मविश्वास यह साबित करते हैं कि सच्ची लगन और मेहनत से हर सपना पूरा किया जा सकता है।
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प्रमुख उपलब्धियां
- भारत की पहली पूर्णतः नेत्रहीन IFS अधिकारी
- 2014 में यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण
- 2015 बैच की भारतीय विदेश सेवा अधिकारी
- जकार्ता स्थित भारतीय दूतावास में फर्स्ट सेक्रेटरी के रूप में सेवा
- लाखों युवाओं, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए प्रेरणा स्रोत