सपने देखने और उन्हें पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती. अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो हर मुश्किल राह आसान हो जाती है. इस कहावत को सच कर दिखाया है गुजरात की रहने वाली अनीता कापड़ी ने. जी हां, उन्होंने अपने पिता के 75वें जन्मदिन पर 52 साल की उम्र में देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक, चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) को पास कर एक मिसाल कायम की है.
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23 साल क्राफ्ट टीचर रहीं, फिर बदला रास्ता
अनीता कापड़ी मूल रूप से कॉमर्स ग्रेजुएट हैं, लेकिन उन्होंने अपने जीवन के 23 साल बच्चों को आर्ट एंड क्राफ्ट सिखाने में बिता दिए. नौकरी के दौरान ही उन्हें अहसास हुआ कि उनका असली लगाव गणित और अकाउंटेंसी में है. इसके बाद उन्होंने खुद को अपग्रेड किया और फुल-टाइम जॉब के साथ ही M.Com और B.Ed की डिग्रियां भी हासिल कीं.
48 की उम्र में पिता को दिया अनोखा बर्थडे गिफ्ट
जब अनीता 48 वर्ष की थीं और अपनी नौकरी से रिटायरमेंट के करीब थीं, तब उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया. उनके पिता एक कंपनी सेक्रेटरी (CS) हैं. अनीता अपने पिता को उनके 75वें जन्मदिन पर एक बेहद खास तोहफा देना चाहती थीं और वो तोहफा था खुद का CA बनना. साल 2012 में उन्होंने ICAI के डायरेक्ट एंट्री रूट के जरिए CA कोर्स में रजिस्ट्रेशन कराया. बिना किसी कोचिंग की मदद के, केवल अपनी कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने IPCC (इंटरमीडिएट) की परीक्षा क्लियर कर ली.
मुश्किलों का पहाड़ भी नहीं डिगा सका हौसला
अनीता की राह इतनी आसान नहीं थी. जब उनकी CA फाइनल की परीक्षाएं नजदीक थीं, तब उन पर पारिवारिक जिम्मेदारियों का दोहरा दबाव था. एक तरफ बेटी की शादी की तैयारियां चल रही थीं, तो दूसरी तरफ बेटे की बोर्ड परीक्षाएं थीं. इसी बीच, परीक्षा से ठीक 10 दिन पहले उनकी सास का निधन हो गया. इस भावनात्मक और मानसिक तनाव के बावजूद अनीता ने हार नहीं मानी.
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52 की उम्र में पूरा हुआ सपना
अनीता की जिद और कड़ी मेहनत रंग लाई. 52 साल की उम्र में उन्होंने CA की डिग्री हासिल कर अपने पिता का सपना पूरा किया. सीए बनने के बाद उन्होंने केसी मेहता एंड कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर और सीएनके एंड एसोसिएट एलएलपी में बतौर इनडायरेक्ट टैक्सेशन एग्जीक्यूटिव के रूप में काम किया. आज अनीता अपनी पूर्व सहयोगी सीए कोमल गोस्वामी के साथ मिलकर खुद की प्रैक्टिस शुरू कर चुकी हैं.
अनीता कापड़ी की यह कहानी साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो जिम्मेदारियों के बीच भी सपनों को जिया जा सकता है.