अफगानिस्तान की 31 वर्षीय जाकिया अहमद ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़कर इतिहास रच दिया है. वह एवरेस्ट फतह करने वाली पहली अफगान महिला बन गई हैं. उनकी इस उपलब्धि की चर्चा दुनिया भर में हो रही है. जाकिया की कहानी सिर्फ एक पर्वतारोही की सफलता नहीं, बल्कि हिम्मत, मेहनत और सपनों को पूरा करने की मिसाल भी है.
जाकिया अहमद का बचपन अफगानिस्तान में बीता, जहां लंबे समय से संघर्ष और अस्थिरता का माहौल रहा है. कम उम्र में ही उन्होंने कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया. एक बस पर हुए हमले में वह बच गई थीं, लेकिन इस घटना ने उनकी जिंदगी पर गहरा असर छोड़ा. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने भविष्य पर ध्यान दिया.
भारत में की पढ़ाई
पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करने के कारण जाकिया को छात्रवृत्ति मिली और वह भारत आईं. यहां उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की. पढ़ाई पूरी करने के बाद वह ऑस्ट्रेलिया चली गईं और वहीं रहने लगीं. हालांकि, उनके मन में हमेशा कुछ बड़ा करने की चाह बनी रही.
पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करने के कारण जाकिया को छात्रवृत्ति मिली और वह भारत आईं. यहां उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की. पढ़ाई पूरी करने के बाद वह ऑस्ट्रेलिया चली गईं और वहीं रहने लगीं. हालांकि, उनके मन में हमेशा कुछ बड़ा करने की चाह बनी रही.
भाई की याद में शुरू किया नया सफर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपने छोटे भाई को खोने के बाद जाकिया ने खुद को मजबूत बनाने के लिए पर्वतारोहण की तरफ कदम बढ़ाया. उन्होंने धीरे-धीरे ट्रेनिंग शुरू की और कई पहाड़ों पर चढ़ाई कर अनुभव हासिल किया. इसके बाद उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का लक्ष्य तय किया.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपने छोटे भाई को खोने के बाद जाकिया ने खुद को मजबूत बनाने के लिए पर्वतारोहण की तरफ कदम बढ़ाया. उन्होंने धीरे-धीरे ट्रेनिंग शुरू की और कई पहाड़ों पर चढ़ाई कर अनुभव हासिल किया. इसके बाद उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का लक्ष्य तय किया.
आखिरकार पूरा हुआ सपना
कई महीनों की तैयारी और कठिन मेहनत के बाद जाकिया ने 21 मई 2026 को माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर अपना सपना पूरा कर लिया. लगभग 8,849 मीटर ऊंची इस चोटी तक पहुंचना बेहद कठिन माना जाता है. यहां कम ऑक्सीजन, तेज हवाएं और बेहद ठंडा मौसम पर्वतारोहियों की परीक्षा लेते हैं.
कई महीनों की तैयारी और कठिन मेहनत के बाद जाकिया ने 21 मई 2026 को माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर अपना सपना पूरा कर लिया. लगभग 8,849 मीटर ऊंची इस चोटी तक पहुंचना बेहद कठिन माना जाता है. यहां कम ऑक्सीजन, तेज हवाएं और बेहद ठंडा मौसम पर्वतारोहियों की परीक्षा लेते हैं.
कई महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
जाकिया ने अपनी सफलता को अफगानिस्तान की महिलाओं और लड़कियों को समर्पित किया है. उनका कहना है कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इंसान अपने लक्ष्य पर डटा रहे तो सफलता जरूर मिलती है. उनकी यह उपलब्धि उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है जो जीवन में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.
जाकिया ने अपनी सफलता को अफगानिस्तान की महिलाओं और लड़कियों को समर्पित किया है. उनका कहना है कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इंसान अपने लक्ष्य पर डटा रहे तो सफलता जरूर मिलती है. उनकी यह उपलब्धि उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है जो जीवन में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.


