राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी दस्तावेजों में ‘दलित’ शब्द पर रोक, अब केवल Scheduled Caste या अनुसूचित जाति लिखा जाएगा
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने कहा कि INC द्वारा छूट दिए जाने के बाद राज्य सरकार या आयुक्त को नया पात्रता मानदंड तय करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने नियम 4(4) का हवाला देते हुए कहा कि नर्सिंग प्रवेश में सिर्फ INC के मानक लागू होंगे। राज्य उनमें बदलाव नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट के मां वैष्णो देवी और आशा मामले का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा के मानक केंद्र से तय होते हैं, राज्य सिर्फ लागू करेगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि 10वीं परसेंटाइल लगाने के बाद भी 2,000 से अधिक सीटें खाली रहीं। इससे संसाधनों का नुकसान हुआ और पात्र छात्र भी वंचित रह गए। राज्य सरकार ने अदालत में तर्क दिया कि प्रवेश की अंतिम तिथि निकल चुकी है, इसलिए अब राहत नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट ने यह दलील खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं ने समय पर अदालत का दरवाजा खटखटाया था और देरी न्यायिक प्रक्रिया के कारण हुई। ऐसी स्थिति में छात्रों को नुकसान नहीं उठाना चाहिए। अदालत ने नर्सिंग कॉलेजों को आवश्यक होने पर अतिरिक्त कक्षाएं और क्लीनिकल प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश भी दिए हैं ताकि छात्र निर्धारित पाठ्यक्रम और उपस्थिति की शर्तें पूरी कर सकें।
आज बैंक जाना है? 11 जुलाई को बैंक खुलेंगे या रहेगा अवकाश, मिनटों में दूर करें कन्फ्यूजन; RBI Holiday List में देखें पूरी जानकारी
ये हैं दिशा निर्देश
1. नई काउंसलिंग: राज्य सरकार को 15 दिन के भीतर रिक्त सीटों के लिए नई काउंसलिंग का शेड्यूल जारी करना होगा
2. बिना परसेंटाइल शर्त: प्रवेश INC के 29 दिसंबर 2025 के निर्देशों के अनुसार बिना न्यूनतम परसेंटाइल के होगा
3. मेरिट के आधार पर: प्रवेश कॉमन एंट्रेंस टेस्ट की इंटर-से मेरिट और अन्य पात्रता पर होगा
4. अतिरिक्त क्लास: कॉलेजों को छात्रों के लिए अतिरिक्त कक्षा और क्लीनिकल प्रशिक्षण कराना होगा