Israel-US Attack On Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान पर हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि ये हमले इसलिए जरूरी थे क्योंकि ईरान न्यूक्लियर हथियार बनाने की कगार पर था और इससे पूरी दुनिया को बड़ा खतरा हो सकता था। ट्रंप ने दावा किया कि तेहरान पहले हमला करने की तैयारी कर रहा था, इसलिए अमेरिका को पहले कार्रवाई करनी पड़ी।
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‘ईरान पहले हमला करने वाला था’
ट्रंप ने कहा, “बातचीत से लग रहा था कि ईरान पहले हमला करने वाला था। मैं ऐसा नहीं होने देना चाहता था। अगर कुछ होता तो मैं इजरायल को मजबूर करता।” उन्होंने ईरानी शासन को बीमार और पागल बताते हुए कहा कि अगर इन पर हमला ना होता तो ये कई देशों को तबाह कर देते। ट्रंप बोले, “ये लोग मानसिक रूप से बीमार हैं, गुस्से में हैं, पागल हैं। अगर इनके पास न्यूक्लियर वेपन होता तो ये इस्तेमाल कर देते।”
‘3 साल पहले ईरान के पास होता न्यूक्लियर वेपन’
ट्रंप ने इंटेलिजेंस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आने वाले खतरे की जानकारी मिली थी। उन्होंने दावा किया कि ईरान मिसाइलें तैयार कर रहा था और अगर अमेरिका ने कार्रवाई ना की होती तो एक महीने में ईरान के पास बहुत ताकतवर न्यूक्लियर हथियार होता। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की आलोचना की और कहा कि ओबामा की डील ने ईरान को मिडिल ईस्ट में बहुत ताकत दी थी। अगर ट्रंप ने वो डील खत्म ना की होती तो ईरान 3 साल पहले ही न्यूक्लियर वेपन के साथ बैठा होता।
‘ईरान न्यूट्रल देशों पर हमला कर रहा है’
ट्रंप ने ईरान पर 47 साल से आतंक फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हमलों से ईरान की क्षमता बहुत कम हो गई है। उनकी मिसाइलों की संख्या घट रही है, एयर प्रोटेक्शन और डिटेक्शन सुविधाएं लगभग खत्म हो गई हैं। ईरान अब न्यूट्रल देशों पर हमला कर रहा है, जिससे सभी उसके खिलाफ हो गए हैं। यूरोपीय देशों पर ट्रंप ने अलग-अलग राय जताई। उन्होंने कहा कि कुछ देश मददगार रहे, जैसे जर्मनी बहुत अच्छा रहा, लेकिन स्पेन बहुत बुरा रहा। उन्होंने UK से भी नाखुशी जताई।
अयातुल्ला अली खामेनेई की हुई मौत
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई शहरों में हवाई हमले किए, जिनमें मिलिट्री कमांड सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल साइट्स और शासन के महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बनाया गया। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सहित वरिष्ठ सैन्य और सुरक्षा अधिकारी मारे गए हैं।
ईरान ने ऐसे किया पलटवार
ईरान ने जवाब में खाड़ी देशों में अमेरिकी मिलिट्री बेस और इजरायल के अन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इनमें इजरायल, बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन शामिल हैं। इससे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है और आम लोगों तथा विदेशियों के लिए खतरा बहुत ज्यादा हो गया है।
एक पेज पर हैं अमेरिका और जर्मनी
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ ओवल ऑफिस में बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि मर्ज उनके दोस्त बन गए हैं। दोनों ने ईरान पर चर्चा की और बड़ी ट्रेड डील्स पर भी बात हुई। मर्ज ने कहा कि तेहरान के इस भयानक शासन को हटाने में दोनों एक ही पेज पर हैं। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया है।


