राजस्थान में रेल यात्रियों के सुरक्षित सफर की दिशा में उत्तर पश्चिम रेलवे (NWR) ने अहम उपलब्धि हासिल की है। जयपुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले 67 किलोमीटर लंबे कानोता-बांदीकुई रेलखंड पर भारतीय रेलवे के स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम ‘कवच’ का अंतिम सेफ्टी एक्सेप्टेंस ट्रायल (SAT) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
इस ट्रायल के सफल होने के बाद यह रेलखंड उत्तर पश्चिम रेलवे का पहला ‘कवच-सुरक्षित’ रेलखंड बनने की दिशा में आगे बढ़ गया है। अब मुख्य संरक्षा आयुक्त से अंतिम सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद इस रेलखंड पर कवच प्रणाली का संचालन शुरू किया जा सकेगा।
राजस्थान पुलिस का बड़ा एक्शन: साइबर ठगों का साथ देने वाले 10 हजार से ज्यादा संदिग्धों को नोटिस
67 KM के रूट पर हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था
कानोता-बांदीकुई रेलखंड के 7 प्रमुख ब्लॉक स्टेशनों पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, रेडियो टावर और RFID तकनीक स्थापित की गई है। रेलवे ने पूरे रेलखंड पर डिजिटल सिग्नलिंग और आधुनिक संचार व्यवस्था तैयार की है।
ट्रैक पर लगाए गए RFID टैग और इंजन में मौजूद सेंसर के जरिए ट्रेन की लोकेशन, स्पीड और सिग्नल से जुड़ी जानकारी लगातार सिस्टम तक पहुंचती है। यह जानकारी लोको पायलट के केबिन में लगे डिस्प्ले पर भी दिखाई देती है।
रेड सिग्नल पार करने पर खुद लगेगा ब्रेक
अंतिम सेफ्टी ट्रायल के दौरान रेलवे इंजीनियर्स और सुरक्षा विशेषज्ञों की मौजूदगी में कई आपातकालीन परिस्थितियों का परीक्षण किया गया। इनमें ट्रेन का रेड सिग्नल पार करना, एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनों का आमने-सामने आना और निर्धारित गति सीमा से अधिक रफ्तार में ट्रेन चलाना शामिल था।
ट्रायल के दौरान जब लोको पायलट की ओर से समय पर ब्रेक नहीं लगाया गया, तो कवच सिस्टम ने स्थिति को पहचानकर ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग लागू की और ट्रेन को सुरक्षित रूप से रोक दिया।
कोहरे में भी लोको पायलट को मिलेगी सिग्नल की जानकारी
सर्दियों में जयपुर, अलवर और बांदीकुई समेत कई इलाकों में कोहरे के कारण लोको पायलटों को सिग्नल देखने में परेशानी होती है। कवच प्रणाली के लोको-केबिन डिस्प्ले यूनिट (DMI) पर अगले सिग्नल की स्थिति और दूरी की जानकारी उपलब्ध होगी।
इससे खराब दृश्यता की स्थिति में भी लोको पायलट को आगे के सिग्नल और ट्रेन की स्थिति की जानकारी मिल सकेगी। सिस्टम जरूरत पड़ने पर निर्धारित सुरक्षा नियमों के अनुसार ऑटोमैटिक ब्रेकिंग भी कर सकता है।
2600 करोड़ रुपये की परियोजना
उत्तर पश्चिम रेलवे के नेटवर्क में कवच प्रणाली के विस्तार के लिए करीब 2,600 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम किया जा रहा है। इसके तहत राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में उत्तर पश्चिम रेलवे के करीब 5,561 किलोमीटर रेल नेटवर्क को कवच से लैस करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा निर्माणाधीन करीब 281 किलोमीटर नई रेल लाइनों में भी शुरुआत से ही कवच प्रणाली को शामिल किया जा रहा है।
190 रेडियो टावर और 1,586 KM OFC का काम
कवच के लिए जरूरी संचार ढांचे को तैयार करने का काम भी तेजी से चल रहा है। प्रस्तावित 253 रेडियो कम्युनिकेशन टावरों में से 190 टावर स्थापित किए जा चुके हैं।
वहीं, सिग्नलिंग और डेटा संचार के लिए 1,586 किलोमीटर से ज्यादा रूट पर ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) बिछाने का काम करीब 87 प्रतिशत पूरा हो चुका है।
रेलवे प्रशासन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 तक अतिरिक्त 250 किलोमीटर मुख्य रेल मार्गों को कवच प्रणाली के तहत संचालित करने का लक्ष्य रखा है।
मानवीय गलती से होने वाले जोखिम को कम करने में मदद
कवच प्रणाली का मुख्य उद्देश्य सिग्नल की अनदेखी (SPAD), ओवरस्पीड और कुछ अन्य मानवीय त्रुटियों से जुड़े जोखिम को कम करना है। यदि लोको पायलट निर्धारित परिस्थितियों में समय पर प्रतिक्रिया नहीं देता है, तो सिस्टम चेतावनी देने के साथ जरूरत पड़ने पर स्वचालित ब्रेकिंग की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
इस तरह कानोता-बांदीकुई रेलखंड पर कवच के अंतिम सेफ्टी ट्रायल का पूरा होना राजस्थान में आधुनिक रेल सुरक्षा व्यवस्था के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


