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क्या होते हैं अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स?
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स वे होते हैं जिन्हें फैक्ट्री में कई तरह की प्रोसेसिंग के बाद तैयार किया जाता है. इनमें स्वाद बढ़ाने के लिए ज्यादा नमक, शुगर, प्रिजर्वेटिव और आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाए जाते हैं. चिप्स, पैकेट वाले बिस्किट, इंस्टेंट नूडल्स, शुगरी सीरियल्स, प्रोसेस्ड मीट और सॉफ्ट ड्रिंक्स इसके बड़े उदाहरण हैं. ये खाने में स्वादिष्ट जरूर लगते हैं, लेकिन शरीर और दिमाग दोनों पर धीरे-धीरे असर डाल सकते हैं.
स्टडी में क्या सामने आया?
नई स्टडी के मुताबिक जिन लोगों की डाइट में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स ज्यादा थे, उनमें याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता कमजोर होने का खतरा ज्यादा देखा गया. रिसर्च में यह भी सामने आया कि अगर किसी व्यक्ति की रोज की डाइट में सिर्फ 10% हिस्सा भी ऐसे फूड्स का हो, जो लगभग एक पैकेट चिप्स के बराबर माना गया, तो डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि खतरा धीरे-धीरे बढ़ता गया, यानी जितना ज्यादा जंक फूड, उतना ज्यादा रिस्क. ये स्टडी मोनाश यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स द्वारा की गई थी. यह स्टडी जर्नल अल्जाइमर्स एंड डिमेंशिया: डायग्नोसिस, असेसमेंट एंड डिजीज मॉनिटरिंग में प्रकाशित हुई है.
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दिमाग पर कैसे पड़ता है असर?
शोधकर्ताओं का मानना है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं, जिसका असर दिमाग पर भी पड़ता है. इनमें जरूरी पोषक तत्व कम होते हैं और अनहेल्दी फैट्स ज्यादा होते हैं. स्टडी में ऐसे लोगों में ध्यान लगाने में परेशानी, फोकस कम होना और मानसिक प्रतिक्रिया धीमी होने जैसे संकेत भी मिले. शुरुआत में ये बदलाव छोटे लग सकते हैं, लेकिन लंबे समय में ये गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारण बन सकते हैं.