Snake Bite: बारिश और मानसून का मौसम आते ही खेतों, बगीचों, झाड़ियों और यहां तक कि घरों के अंदर भी सांप निकलने की घटनाएं काफी बढ़ जाती हैं. इस मौसम में अक्सर सर्पदंश यानी सांप काटने के दर्दनाक मामले सामने आते हैं. कई बार लोग घबराहट में या झाड़-फूंक के चक्कर में मरीज को अस्पताल ले जाने में देरी कर देते हैं, जिससे जान पर बन आती है. बारिश और मानसून में सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे Snake Bite यानी सर्पदंश के मामले भी सामने आते हैं. उत्तर प्रदेश NHM की नई एडवाइजरी के अनुसार सांप काटने के बाद पहला 1 घंटा सबसे अहम होता है. ऐसे में जानना जरूरी है कि सांप काटने पर क्या करें, कौन से लक्षण दिखते हैं और किन गलतियों से बचना चाहिए. इसी खतरे को देखते हुए उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने आम लोगों के लिए एक अहम एडवाइजरी जारी की है. साफ कहा गया है कि सांप के काटने पर शुरुआती 1 घंटा सबसे क्रिटिकल यानी ‘गोल्डन ऑवर’ होता है. अगर इसी समय मरीज को सही इलाज मिल जाए तो जान बचना लगभग तय है.
झाड़-फूंक या तांत्रिक के चक्कर में एक मिनट भी समय बर्बाद न करें.
डंक वाली जगह पर चीरा न लगाएं और न ही मुंह से जहर चूसने की कोशिश करें.
घाव पर कोई देसी जड़ी-बूटी, गोबर या मिट्टी जैसी चीजें न बांधें.
रस्सी या कपड़े को बहुत ज्यादा कसकर न बांधें, इससे खून का दौरा पूरी तरह रुक सकता है और अंग काटना पड़ सकता है.
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक सांप के जहर का एकमात्र पक्का इलाज एंटीवेनम इंजेक्शन ही है. सरकारी अस्पतालों में यह पूरी तरह मुफ्त मिलता है. इसलिए अफवाहों से बचें और लक्षण दिखते ही तुरंत डाक्टर की मदद लें.
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