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फिर बिजली का बिल क्यों बढ़ जाता है?
CSPDCL का कहना है कि स्मार्ट मीटर नहीं, बल्कि बिजली की बढ़ी हुई खपत बिल बढ़ने का प्रमुख कारण है। खासकर अप्रैल, मई और जून में पढ़ने वाली भीषण गर्मी में एसी, कूलर, हीटर और अन्य विद्युत उपकरणों का अधिक उपयोग होने से खपत बढ़ जाती है। इसके अलावा, खपत बढ़ने पर उपभोक्ता उच्च टैरिफ स्लैब में पहुंच जाते हैं, जिससे बिल स्वाभाविक रूप से अधिक आता है।
विभाग ने स्पष्ट किया कि घरेलू बिजली बिल निर्धारित टैरिफ स्लैब के अनुसार तय किया जाता है। वर्तमान में दरें इस प्रकार हैं—
- 0 से 100 यूनिट तक ₹4.40 प्रति यूनिट
- 101 से 200 यूनिट तक ₹4.50 प्रति यूनिट
- 201 से 400 यूनिट तक ₹6.00 प्रति यूनिट
- 401 से 600 यूनिट तक ₹7.00 प्रति यूनिट
- 600 यूनिट से अधिक पर ₹8.80 प्रति यूनिट
जैसे-जैसे बिजली की खपत बढ़ती है, उपभोक्ता उच्च स्लैब में पहुंच जाते हैं और बिल भी उसी अनुपात में बढ़ता है। इसका स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली से कोई संबंध नहीं है।
हाफ बिजली योजना पर भी रखें नजर
विभाग ने बताया कि यदि मासिक खपत 400 यूनिट के भीतर रहती है तो पात्र उपभोक्ताओं को हाफ बिजली योजना का लाभ मिलता रहता है। लेकिन 400 यूनिट से अधिक खपत होने पर योजना का लाभ प्रभावित हो सकता है, जिससे बिल बढ़ा हुआ दिखाई देता है। बिजली विभाग ने यह भी बताया कि अब तक स्मार्ट मीटर से संबंधित शिकायतों की जांच में मीटर की तकनीकी गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है।
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यदि किसी उपभोक्ता को कोई शिकायत हो तो वह 1912 हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकता है। विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली ऐप’ का अधिकतम उपयोग कर अपनी बिजली खपत पर नजर रखें तथा प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का लाभ लेकर अपने बिजली बिल को और कम, अथवा पात्रता के अनुसार शून्य तक करने की दिशा में कदम बढ़ाएं।