नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने से 7 लोगों की मौत के बाद MCD ने राजधानी के सभी जोनों में भवनों की जांच के आदेश दिए हैं. सभी कार्यपालक अभियंताओं को अपने-अपने क्षेत्रों की इमारतों का निरीक्षण कर 10 सितंबर तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है. निरीक्षण के दौरान जुटाई गई जानकारी को दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल किए जाने वाले हलफनामे का हिस्सा बनाया जाएगा. MCD के अतिरिक्त आयुक्त स्वयं इस प्रक्रिया की निगरानी करेंगे, ताकि किसी भी संभावित खतरे वाली इमारत की पहचान की जा सके.
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अधिकारियों पर भी कार्रवाई
सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने दक्षिणी जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार समेत चार इंजीनियरिंग अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. उनकी जगह दक्षिण-पश्चिम जोन के डिप्टी कमिश्नर शाश्वत सौरभ को दक्षिणी जोन की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है. प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने की कोशिश में है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.
बिल्डिंग मालिक और उनकी पत्नी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत
बता दें कि 6 सितंबर को सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से 7 लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले में बिल्डिंग मालिक हरिराम गुप्ता और उर्मिला गुप्ता को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, जबकि उनके बेटे महेश गुप्ता को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इमारत का बिजली कनेक्शन हरिराम गुप्ता के नाम पर था, जबकि उसका बेटा इसकी देखरेख करता था. प्रॉपर्टी हरिराम की पत्नी उर्मिला गुप्ता के नाम पर रजिस्टर्ड थी. पुलिस ने हरिराम को राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ा था.
6 सितंबर को जब बिल्डिंग गिरी है, तब उसके बेसमेंट में काम चल रहा था. इसी दौरान हादसा हुआ और उसमें मौजूद छात्रों समेत कई लोग दब गए. हादसे में छात्रों समेत सात लोगों की मौत हो गई. 24 घंटे से ज्यादा समय तक रेस्क्यू चला. दिल्ली नगर निगम (MCD) ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद अपने साउथ जोन के पांच अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है.
सस्पेंड किए गए अधिकारी
सस्पेंड किए गए अधिकारियों में डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, सुपरिटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (बिल्डिंग) ललित कुमार गोयल, असिस्टेंट इंजीनियर (बिल्डिंग) सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर (बिल्डिंग) आशीष कुमार शामिल हैं. इनमें से तीन अधिकारी- राकेश कुमार, रणवीर सिंह और आशीष कुमार, उस समय भी साउथ ज़ोन में ही तैनात थे जब मालवीय नगर में आग लगने की घटना हुई थी. उस घटना के बाद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी. सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है.
दिल्ली हाई कोर्ट ने दिए हाई-लेवल जांच के आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस घटना की हाई-लेवल जांच के आदेश दिए हैं. साथ ही MCD से कहा है कि वह जांच करे कि क्या इमारत के पास ज़रूरी मंज़ूरी थी और क्या सिविक अधिकारियों की तरफ़ से कोई लापरवाही हुई थी. कोर्ट ने ज़िम्मेदार पाए गए अधिकारियों के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी है.
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हाई कोर्ट ने MCD से सवाल किए, PG की जांच के आदेश दिए
दिल्ली हाई कोर्ट ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना को “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” बताया और कहा कि इसके लिए सिर्फ़ इमारत के मालिकों को ही ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. कोर्ट ने MCD और दिल्ली यूनिवर्सिटी की भूमिका की ओर भी इशारा किया. कोर्ट ने शहर के बाहर से दिल्ली आने वाले छात्रों के लिए उपलब्ध रहने की जगहों की हालत पर चिंता जताई और अधिकारियों को छात्रों के रहने की व्यवस्था से जुड़े बड़े मुद्दे पर ध्यान देने का निर्देश दिया. MCD को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले PG और हॉस्टल की जांच करे और देखे कि क्या उनके पास ज़रूरी मंज़ूरी है और क्या वे बिल्डिंग से जुड़े नियमों का पालन कर रहे हैं. कोर्ट के निर्देशों के बाद MCD के एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों (बिल्डिंग) से कहा गया है कि वे अपने-अपने ज़ोन में इमारतों का निरीक्षण करें और 10 सितंबर 2026 तक बिल्डिंग हेडक्वार्टर को अपने हस्ताक्षर के साथ विस्तृत रिपोर्ट सौंपें. MCD ने कहा है कि निरीक्षण से मिली जानकारी को उस हलफनामे में शामिल किया जाएगा, जिसे 10 दिनों के भीतर दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल किया जाना है. इस प्रक्रिया की निगरानी और देखरेख संबंधित ज़ोनल एडिशनल कमिश्नर व्यक्तिगत रूप से करेंगे.


