दिल्ली में बढ़ती ई-रिक्शा दुर्घटनाओं और यातायात अव्यवस्था को देखते हुए परिवहन विभाग ने ई-रिक्शा और ई-कार्ट चालकों के लाइसेंस नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब लाइसेंस प्राप्त करने के लिए ई-रिक्शा डीलरों द्वारा जारी प्रशिक्षण प्रमाणपत्र मान्य नहीं होंगे। आवेदकों को केवल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थानों से प्रशिक्षण लेना होगा। नए नियमों के तहत ई-रिक्शा या ई-कार्ट चालक बनने के इच्छुक व्यक्तियों को 10 दिन का अनिवार्य प्रशिक्षण पूरा करना होगा। प्रशिक्षण प्रमाणपत्र जमा करने के बाद ही वे परिवहन विभाग की ड्राइविंग परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। परीक्षा पास करने और लाइसेंस मिलने के बाद ही उनके नाम पर ई-रिक्शा या ई-कार्ट का पंजीकरण किया जाएगा।
इजरायल का बड़ा सैन्य अभियान: हिजबुल्लाह के 150 ठिकानों पर भीषण हवाई हमले, ब्रिगेडियर जनरल और कैप्टन समेत कई की मौत
परिवहन विभाग के अनुसार, ई-रिक्शा शुरू होने के समय से ही 10 दिन के प्रशिक्षण का प्रावधान था। पहले यह जिम्मेदारी निर्माता कंपनियों और उनके डीलरों को दी गई थी, लेकिन शिकायतें मिलीं कि कई स्थानों पर बिना प्रशिक्षण दिए ही प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे थे। इस मामले की जांच भी चल रही है। सरकार ने अब ऐसे प्रशिक्षण स्कूलों और संस्थानों को अधिकृत किया है जिनके पास व्यावहारिक और सुरक्षा प्रशिक्षण की उचित व्यवस्था है। प्रशिक्षण में यातायात नियम, सुरक्षित ड्राइविंग, पार्किंग, चौराहों पर वाहन संचालन, रात्रि ड्राइविंग तथा ब्रेक फेल, टायर फटना और आग लगने जैसी आपात स्थितियों से निपटने के तरीके सिखाए जाएंगे।
IND vs AFG: शुभमन गिल–ऋषभ पंत ने मचाया धमाल, 8 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त, अफगानिस्तान के खिलाफ रचा नया कीर्तिमान
दिल्ली में लगभग दो लाख पंजीकृत ई-रिक्शा हैं, जबकि तीन लाख से अधिक अवैध ई-रिक्शा संचालित होने का अनुमान है। इनके खिलाफ भी विशेष अभियान चलाने की तैयारी है। आंकड़ों के अनुसार, ई-रिक्शा दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या लगातार बढ़ी है। वर्ष 2021 में 10, 2022 में 8, 2023 में 18, 2024 में 20 और 2025 में 36 लोगों की जान गई। ओवरलोडिंग, गलत दिशा में वाहन चलाना, रेड लाइट जंप करना और अपर्याप्त प्रशिक्षण दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।