HPCL के मुताबिक रिफाइनरी में पुनर्स्थापन का काम जारी है और इसके अगले 3–4 सप्ताह में पूरा होने की संभावना है. क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट को मई 2026 के दूसरे पखवाड़े में फिर से ऑपरेशनल किए जाने की संभावना है. HPCL के मुताबिक मुख्य उत्पादों (एलपीजी/एमएस/एचएसडी/नैफ्था) का परीक्षणात्मक उत्पादन मई 2026 में प्रारंभ हो जाएगा और इसके पश्चात इकाइयों को स्थिर / कमीशन किया जाएगा.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार, 21 अप्रैल को राजस्थान के बालोतरा ज़िले के पचपदरा में भारत के पहले ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स (Refinery-cum-Petrochemical Complex) राष्ट्र को समर्पित करने वाले थे. लेकिन इस हादसे की वजह से उनका दौरा टालना पड़ा.
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, अधिग्रहण की नई तिथि की घोषणा जल्द ही की जाएगी. प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और राजस्थान सरकार के संयुक्त उद्यम (joint venture) के तौर पर विकसित इस 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) की प्रोडक्शन क्षमता वाले ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स प्रोजेक्ट पर कुल 79,450 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है.
एडवांस्ड टेक्नोलॉजी की मदद से तैयार इस state-of-the-art परिसर की पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन की क्षमता 2.4 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष की है. पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, इस रिफाइनरी का नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (Nelson Complexity Index ) 17.0 है जो काफी उच्च स्तर का है!
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नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (Nelson Complexity Index ) एक अंतर्राष्ट्रीय मानक है जो ये दर्शाता है कि एक रिफाइनरी साधारण कच्चे तेल (crude oil) से कितने उच्च मूल्य के उत्पाद (जैसे पेट्रोल, डीजल) बनाने में सक्षम है. इस प्रोजेक्ट को वैश्विक मानकों के आधार पर तैयार किया गया है.
पीएमओ के मुताबिक, इस पेट्रोकेमिकल प्रोजेक्ट से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और औद्योगिक विकास को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी. साथ ही, बालोतरा ज़िले और आसपास के इलाकों में ये एक पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक पार्क विकसित करने में एक anchor industry के तौर पर भी मददगार होगा.