Ebola Virus Outbreak: एक युवक की मौत के बाद अस्पताल के बाहर ऐसा गुस्सा फूटा कि देखते ही देखते हालात हिंसा में बदल गए. लोगों ने अस्पताल पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए, आइसोलेशन वार्ड में आग लगा दी और पुलिस को भीड़ को रोकने के लिए चेतावनी वाली गोलियां चलानी पड़ीं. मामला अफ्रीकी देश कांगो का है, जहां इबोला वायरस का खौफ लगातार बढ़ रहा है. यह घटना तब हुई जब युवक के परिवार और दोस्तों को उसका शव अंतिम संस्कार के लिए ले जाने से रोक दिया गया. अधिकारियों को शक था कि उसकी मौत इबोला वायरस से हुई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के अनुसार डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में 600 संदिग्ध मामलों में से 139 लोगों की मौत इबोला से होने की आशंका है. हालांकि कांगो के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल रोजर काम्बा ने सरकारी चैनल RTNC टीवी से कहा कि अधिकारियों ने 159 मौतें दर्ज की हैं.
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय नेता लुक मलेंबे मलेंबे ने बताया, “लोगों ने अस्पताल पर पत्थर और दूसरी चीजें फेंकनी शुरू कर दीं. उन्होंने उन टेंटों में भी आग लगा दी जो आइसोलेशन वार्ड के रूप में इस्तेमाल हो रहे थे.” उन्होंने कहा कि यह सब उन्होंने खुद रवामपारा जनरल अस्पताल में देखा. हंगामे के दौरान पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए चेतावनी वाली गोलियां चलाईं. बता दें कि इबोला से मरने वाले व्यक्ति का शव बेहद संक्रामक माना जाता है. वायरस को फैलने से रोकने के लिए अधिकारियों को सुरक्षित तरीके से अंतिम संस्कार कराना जरूरी होता है.
Un grupo de manifestantes incendió las tiendas de aislamiento de un hospital en Rwampara, República Democrática del Congo. La… pic.twitter.com/nBCmDc3cSF
इतुरी में इबोला सुरक्षा व्यवस्था को कॉर्डिनेट कर रहे जीन क्लॉड मुकेंदी ने एसोसिएटेड प्रेस (AP) से कहा कि मरने वाला युवक इलाके में काफी लोकप्रिय था और उसके परिवार व दोस्तों को “बीमारी की गंभीरता समझ नहीं आ रही थी.” वहीं रॉयटर्स से बात करने वाले प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि वह युवक फुटबॉलर था और कई स्थानीय टीमों के लिए खेल चुका था. उसकी मां ने न्यूज एजेंसी से कहा कि उन्हें लगता है कि उनके बेटे की मौत इबोला नहीं बल्कि टाइफाइड बुखार से हुई थी. WHO इबोला पीड़ितों के लिए “सुरक्षित और सम्मानजनक अंतिम संस्कार” की सलाह देता है. इसके तहत प्रशिक्षित टीमें सुरक्षा उपकरण पहनकर शवों को संभालती हैं. इबोला वायरस के दो मामले कांगो के पड़ोसी देश युगांडा में भी पाए गए हैं.
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