आज के समय में जहां लोग 40-50 की उम्र के बाद ही अपने शरीर को कमजोर मानने लगते हैं, वहीं एक 80 साल की दादी ने पूरी दुनिया को दिखा दिया है कि अगर इरादा मजबूत हो तो उम्र कोई मायने नहीं रखती है. यह कहानी एक ऐसी महिला की है , जिन्होंने अपने जीवन के 70वें साल में खुद को पूरी तरह बदलने का फैसला किया. कभी दवाइयों और बीमारियों पर निर्भर रहने वाली यह महिला आज जिम में घंटों पसीना बहाती हैं, भारी वजन उठाती हैं और हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. उनका मानना है कि हमारा शरीर किसी भी उम्र में बदल सकता है. इसके लिए सिर्फ सही दिशा और डेली रूटीन की जरूरत है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि 80 साल की दादी का फिटनेस रूटीन क्या है.
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कौन हैं 80 साल की यह दादी?
ये 80 साल की दादी कनाडा की रहने वाली जोन मैकडॉनल्ड है, जो आज के समय में फिटनेस की एक बड़ी मिसाल बन चुकी हैं. उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर इंसान के अंदर मजबूत इरादा हो, तो वह किसी भी उम्र में अपने शरीर को बदल सकता है.जोन पहले कई बीमारियों से जूझ रही थीं. उन्हें हाई ब्लड प्रेशर, एसिडिटी, चक्कर आना और गठिया जैसी समस्याएं थीं. लेकिन आज वही महिला जिम में भारी वजन उठाती हैं, रोजाना कसरत करती हैं और लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. उनकी कहानी बताती है कि फिटनेस का कोई एक्सपायरी डेट नहीं होता है.
दवाइयों से फिटनेस तक का सफर कैसे शुरू हुआ?
70 साल की उम्र में उनका वजन करीब 90 किलो था. उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं थीं जैसे हाई ब्लड प्रेशर, एसिडिटी (acid reflux), चक्कर आना (vertigo), जोड़ों में दर्द (arthritis), डॉक्टर उनकी दवाइयों की मात्रा बढ़ा रहे थे, लेकिन उन्होंने हार मानने की जगह खुद को बदलने का फैसला लिया. इस बदलाव में उनकी बेटी ने उनका साथ दिया, जो फिटनेस एक्सपर्ट थीं. धीरे-धीरे उन्होंने एक्सरसाइज और सही खान-पान शुरू किया और लगभग 3 साल में 29 किलो वजन कम कर लिया.
80 साल की दादी का फिटनेस रूटीन क्या है?
1. वॉर्म-अप से शुरुआत – हर वर्कआउट से पहले जोन अच्छे से वॉर्म-अप करती हैं. जिससे मांसपेशियां और जोड़ों को चोट से बचाया जा सके.
2. हफ्ते में 5 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग – वह हफ्ते में पांच दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करती हैं. वह भारी वजन उठाने से नहीं डरतीं और अपने वर्कआउट में बेंच प्रेस, स्क्वाट्स, लैट पुल डाउन और मशीन एक्सरसाइज शामिल करती हैं. शुरुआत में उन्होंने मशीनों का ज्यादा इस्तेमाल किया. जिससे शरीर पर ज्यादा दबाव न पड़े, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने खुद को मजबूत बनाकर फ्री वेट्स की तरफ कदम बढ़ाया.
3. कार्डियो – स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के साथ-साथ वह कार्डियो पर भी पूरा ध्यान देती हैं. वह हफ्ते में तीन से सात दिन तक कार्डियो करती हैं और हर बार 15 से 45 मिनट तक एक्सरसाइज करती हैं. इससे उनका दिल स्वस्थ रहता है और उनकी स्टैमिना भी बढ़ता है.
4. स्ट्रेचिंग – जोन हर वर्कआउट के बाद 15 मिनट तक स्ट्रेचिंग करती हैं. इससे मांसपेशियों को आराम मिलता है, शरीर में लचीलापन बना रहता है और रिकवरी जल्दी होती है. यही वजह है कि वह लगातार एक्टिव और फिट बनी रहती हैं.
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जोन की डाइट और लाइफस्टाइल
फिटनेस सिर्फ जिम तक सीमित नहीं है, बल्कि खान-पान और सोच भी उतनी ही जरूरी है. ऐसे में जोन रोज करीब 150 ग्राम प्रोटीन लेती हैं, भरपूर 3 लीटर पानी पीती हैं और सिर्फ कैलोरी गिनने की जगह प्रोटीन, कार्ब्स और फैट यानी मैक्रो प्लानिंग पर फोकस करती हैं. खास बात यह है कि वह पूरी तरह नेचुरल तरीके से फिट बनी हैं और किसी भी तरह के स्टेरॉयड या दवाओं का सहारा नहीं लेतीं, इसके साथ ही वह अपने दिमाग को एक्टिव रखने के लिए मेडिटेशन ऐप्स का इस्तेमाल करती हैं, ब्रेन गेम्स खेलती हैं और नई भाषा सीखती रहती हैं. जोड़ों की देखभाल के लिए वह घुटनों पर सपोर्ट पहनती हैं और जरूरत पड़ने पर बैक सपोर्ट भी लेती हैं, जिससे वह बिना चोट के लगातार एक्टिव रह पाती हैं.
WHO के नियमों से भी आगे
जोन का रूटीन विश्व स्वास्थ्य संगठन के फिटनेस नियमों से भी ज्यादा प्रभावी है. जहां 65 से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए 150 से 300 मिनट एक्टिविटी की सलाह दी जाती है, वहीं जोन इससे ज्यादा करती हैं. वह हफ्ते में 2 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की सलाह है, लेकिन वह 5 दिन करती हैं. बैलेंस और स्ट्रेंथ पर भी पूरा ध्यान देती हैं.