शिक्षा निदेशालय ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सभी स्कूलों में हर 45 से 60 मिनट के अंतराल पर “वाटर बेल” बजाई जाएगी, जिससे बच्चों को नियमित रूप से पानी पीने का ब्रेक मिल सके। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गर्मी के दौरान बच्चे लंबे समय तक बिना पानी पिए न रहें और डिहाइड्रेशन जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव हो सके। इसके साथ ही शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूलों को यह भी निर्देश दिया है कि अत्यधिक गर्मी को देखते हुए खुले में होने वाली गतिविधियों पर रोक लगाई जाए या उन्हें सीमित किया जाए। स्कूलों को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि बच्चों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाए और धूप में लंबे समय तक किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि न कराई जाए।
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निर्देशों के अनुसार स्कूलों में खुले मैदान या परिसर में प्रार्थना सभा और कक्षाएं आयोजित नहीं की जाएंगी सुबह की प्रार्थना सभाओं को इंडोर या शेड वाले स्थानों में सीमित समय के लिए आयोजित करने को कहा गया है इन कदमों का उद्देश्य बच्चों को तेज धूप और लू के सीधे संपर्क से बचाना है, जिससे हीट स्ट्रेस और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा कम हो सके। सरकार ने स्कूल प्रशासन से यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि बच्चों को ठंडे और सुरक्षित वातावरण में रखा जाए, पर्याप्त पानी उपलब्ध हो और अनावश्यक रूप से धूप में गतिविधियां न कराई जाएं।
नियुक्त किए जाएंगे नोडल अधिकारी
शिक्षा निदेशालय ने हर स्कूल में एक नोडल शिक्षक को नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त करने का निर्देश दिया है। इस नोडल अधिकारी की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय की गई हैं, जिनमें शामिल हैं “वाटर बेल सिस्टम” (पानी वाला ब्रेक) को प्रभावी तरीके से लागू करना बच्चों के लिए गर्मी से बचाव पर जागरूकता सत्र आयोजित करना स्कूल परिसर में सूचना एवं संचार (IEC) सामग्री जैसे पोस्टर और दिशा-निर्देश प्रदर्शित करना सभी निर्देशों के पालन की नियमित निगरानी करना इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हीट वेव के दौरान जारी सभी सुरक्षा उपाय केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू हों।
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बच्चों को गर्मी से बचाने शिक्षा निदेशालय ने जारी किए ये दिशा निर्देश
वॉटर बेल पहल
स्कूलों में “वॉटर बेल सिस्टम” लागू किया जाएगा, जिसके तहत हर 45–60 मिनट में घंटी बजाई जाएगी। यह छात्रों को नियमित रूप से पानी पीने की याद दिलाएगी, ताकि वे डिहाइड्रेशन से बच सकें।
आउटडोर गतिविधियों पर नियंत्रण
खुले मैदान में होने वाली प्रार्थना सभाओं को कम किया जाएगा उन्हें छायादार या इंडोर स्थानों पर सीमित समय के लिए आयोजित किया जाएगा खुले में कक्षाएं पूरी तरह बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं
पानी की उपलब्धता सुनिश्चित
छात्रों को निर्देश दिया गया है कि वे पर्याप्त पानी साथ लेकर आएं स्कूलों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि परिसर में सुरक्षित और ठंडा पीने का पानी आसानी से उपलब्ध हो
IEC सामग्री का प्रदर्शन
स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि दिल्ली सरकार स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी लू से संबंधित IEC (सूचना, शिक्षा और संचार) सामग्री को प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किया जाए। नोटिस बोर्ड स्कूल के गलियारे कक्षाएं इससे छात्रों और स्टाफ को लगातार जागरूक रखा जा सकेगा।
जागरूकता सत्र अनिवार्य
स्कूलों को कक्षा या सभा के दौरान छोटे-छोटे जागरूकता सत्र आयोजित करने होंगे, जिनमें लू से बचने के उपाय पर्याप्त पानी पीने का महत्व गर्मी से जुड़ी बीमारियों के लक्षणों की पहचान बताई जाएगी। जरूरत पड़ने पर प्राथमिक उपचार और तुरंत चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बडी सिस्टम लागू
एक बडी (Buddy) सिस्टम लागू करने को कहा गया है, जिसमें हर छात्र को एक साथी के साथ जोड़ा जाएगा। छात्र एक-दूसरे की सेहत पर नजर रखेंगे किसी भी समस्या पर तुरंत सूचना दे सकेंगे
बाहरी गतिविधियों पर रोक
दोपहर के समय छात्रों को बाहरी शारीरिक गतिविधियों से पूरी तरह दूर रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि हीट स्ट्रेस और लू के खतरे को कम किया जा सके।
मौसम अपडेट साझा करना
शिक्षक भारतीय मौसम विभाग (IMD) के नियमित अपडेट कक्षा के व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए अभिभावकों के साथ साझा करेंगे इससे गर्मी से बचाव के उपायों को लेकर लगातार जागरूकता बनी रहेगी
स्कूल में दैनिक चेतावनी
प्रार्थना सभा, कक्षा और नोटिस बोर्ड के माध्यम से हीट वेव का पूर्वानुमान और अलर्ट छात्रों को रोज बताया जाएगा ताकि बच्चे समय रहते सावधानी बरत सकें
सही कपड़े पहनने की सलाह
अभिभावकों को कहा गया है कि बच्चे हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनकर स्कूल आएं इससे शरीर को ठंडा रखने में मदद मिलेगी
व्यक्तिगत स्वच्छता पर जोर
बच्चों को रोजाना नहाने और साफ-सफाई रखने की सलाह इससे वे तरोताजा रहेंगे और गर्मी का असर कम होगा