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भारत खुद बनाएगा गैस, आयात में आएगी कमी
प्रोजेक्ट के तहत अगले 4-5 सालों में कोयला से गैस बनाकर गैस के आयात को कम करने का लक्ष्य रखा गया है. भारत के पास फ़िलहाल 400 अरब टन से ज़्यादा कोयले का भंडार मौजूद है, जिसमें सालाना ख़पत क़रीब एक अरब टन का होती है. इस हिसाब से देश के पास कम से कम 400 सालों का कोयला भंडार मौजूद है. इसी तरह लिग्नाइट का भी 47 अरब टन का भंडार मौजूद है. सरकार ने अब इसी कोयले को गैस में परिवर्तित करने का फैसला किया है, ताकि गैस की आपूर्ति के लिए आयात पर निर्भरता कम की जा सके. पहले चरण में सरकार ने हर साल क़रीब 7.5 करोड़ टन कोयले को गैस में परिवर्तित करने का लक्ष्य रखा है.
25 संयंत्र लगाने की योजना को मंजूरी
सरकार ने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में 25 संयंत्र लगाने की योजना को मंजूरी दी है. योजना के तहत कोयला से गैस बनाने का संयंत्र लगाने वाली कंपनी या संस्था को आर्थिक सहायता देने का फ़ैसला किया गया है. इसके तहत संयंत्र लगाने का कुल 20 फ़ीसदी खर्च सरकार सहायता के रूप में देगी. लक्ष्य रखा गया है कि अगले 4 -5 सालों में कोयले से गैस का उत्पादन शुरू कर दिया जाए. पूरी योजना के लिए सरकार ने 37500 करोड़ रुपए खर्च करने का निर्णय लिया है. फ़ैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि योजना में 3 लाख करोड़ रूपये के निवेश की संभावना है.
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गैस के लिए दूसरे देशों पर कम होगी निर्भरता
अश्वनी वैष्णव के मुताबिक़ इस प्रोजेक्ट से क़रीब 50000 लोगों को रोज़गार मिलेगा. फिलहाल भारत को अपनी एलएनजी आवश्यकता का करीब 50 फ़ीसदी , यूरिया का 20 फ़ीसदी , अमोनिया का करीब 100 फ़ीसदी जबकि मेथनॉल का करीब 90 फीसदी आयात करना पड़ता है. देश में फर्टिलाइजर के उत्पादन के लिए इन सभी चीज़ों की ज़रूरत पड़ती है. कोयला से गैस बनाने के प्रोजेक्ट से इन सभी चीज़ों के आयात को कम करने में मदद मिलेगी और गैस के लिए आयात पर निर्भरता काफ़ी हद तक कम हो जाएगी.