राजस्थान में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: अनिल पालीवाल बने गृह रक्षा महानिदेशक, 4 जिलों के SP समेत 18 IPS अधिकारियों के तबादले
जारी निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक संभाग से उन शिक्षकों का पूरा विवरण निर्धारित प्रारूप में मांगा गया है जो लंबे समय से विद्यालयों में अनुपस्थित हैं। रिपोर्ट में संबंधित शिक्षक का नाम, विषय, वर्तमान पदस्थापन स्थल, कब से अनुपस्थित हैं और अनुपस्थिति का कारण स्पष्ट रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा गया है।
निदेशालय के इस कदम से संकेत मिल रहे हैं कि विभाग बिना अनुमति या लंबे समय से विभिन्न कारणों से ड्यूटी से दूर रहने वाले शिक्षकों के मामलों की राज्य स्तर पर समीक्षा करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आगे आवश्यक प्रशासनिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
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विभागीय सूत्रों के अनुसार, जुटाई जा रही जानकारी का उपयोग कई महत्वपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। इनमें सेवा अभिलेखों का सत्यापन, अनुशासनात्मक कार्रवाई, विद्यालयों में वास्तविक रिक्त पदों का आकलन और जरूरत के अनुसार शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल हो सकता है। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि किन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है और किन पदों पर लंबे समय से कार्य नहीं हो रहा है।