इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा टला! लैंडिंग के दौरान विमान के टायर में लगी आग, 289 यात्रियों में मची अफरा-तफरी
इस तरह बैलेंस करें करियर और बच्चे की बेहतर परवरिश-
1. ‘परफेक्ट’ होने की जरूरत नहीं: अक्सर मांएं सोशल मीडिया या फिल्मों से प्रभावित होकर ‘सुपरवुमन’ बनने की कोशिश करती हैं. वे चाहती हैं कि घर का खाना भी आर्गेनिक हो, बच्चा क्लास में अव्वल आए और ऑफिस में उनका प्रमोशन भी न रुके. यह समझना जरूरी है कि सब कुछ हर समय परफेक्ट नहीं हो सकता. किसी दिन काम का बोझ ज्यादा होगा, तो किसी दिन घर की जरूरतें. अपनी प्रायोरिटीज को लचीला रखें और छोटी गलतियों के लिए खुद को माफ करना सीखें.
2. क्वालिटी समय दें: मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चों को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आप उनके साथ कितने घंटे बिताती हैं, बल्कि इस बात से पड़ता है कि वह समय कैसा है. अगर आप ऑफिस से आने के बाद केवल 30 मिनट भी बिना फोन के, पूरी तरह बच्चे के साथ खेलती हैं या उसकी बातें सुनती हैं, तो वह घंटों साथ रहने से कहीं बेहतर है. यह ‘अनडिवाइडेड अटेंशन’ बच्चे के मानसिक विकास के लिए संजीवनी का काम करता है.
3. जिम्मेदारी साझा करें: एक मां होने का मतलब यह कतई नहीं है कि घर के सारे काम आपकी ही जिम्मेदारी हैं. अपने जीवनसाथी को घर के कार्यों और पेरेंटिंग में बराबर का भागीदार बनाएं. अगर संभव हो, तो परिवार के बुजुर्गों या भरोसेमंद सहायक की मदद लेने में संकोच न करें. जब आप काम का बोझ साझा करती हैं, तो आप मानसिक रूप से शांत रहती हैं, जिसका सीधा सकारात्मक असर आपके बच्चों के स्वभाव पर पड़ता है.
4. काम को प्रेरणा बनाएं, कमजोरी नहीं: अपने बच्चों के सामने अपने करियर को एक ‘बोझ’ की तरह पेश न करें. उन्हें बताएं कि आप जो काम करती हैं, वह समाज के लिए कैसे उपयोगी है. जब बच्चे अपनी मां को मेहनत करते और सफलता पाते देखते हैं, तो उनमें आत्मनिर्भरता, टाइम मैनेजमेंट और लक्ष्य के प्रति समर्पण के संस्कार अपने आप आ जाते हैं. आप उनके लिए सबसे बड़ी ‘रोल मॉडल’ बन सकती हैं.
5. सेल्फ-केयर है जरूरी: अगर आप खुद शारीरिक और मानसिक रूप से थकी हुई हैं, तो आप बच्चों को खुश नहीं रख पाएंगी. अपनी हॉबी के लिए समय निकालें, थोड़ा व्यायाम करें या बस 15 मिनट शांति से बैठें. जब आप खुद को तरोताजा महसूस करेंगी, तभी आप घर और करियर दोनों मोर्चों पर अपना सर्वश्रेष्ठ दे पाएंगी. खुद को दोष देना छोड़ें, क्योंकि एक खुशहाल मां ही एक खुशहाल परिवार की नींव होती है.